परभणी:
“पिछले छह दशकों से राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के माध्यम से छात्रों में श्रम की गरिमा, स्वच्छता, विनम्रता, सहयोग की भावना और नैतिक संस्कारों जैसे सामाजिक मूल्यों को निरंतर रोपा जा रहा है।” यह विचार एनएसएस के जिला समन्वयक प्रो. डॉ. पंढरीनाथ धोंडगे ने व्यक्त किए। वह सोमवार को श्री शिवाजी कॉलेज के एनएसएस विभाग द्वारा नवप्रवेशित स्वयंसेवकों के लिए आयोजित उन्मुखीकरण कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के उप-प्राचार्य डॉ. श्रीनिवास केशेट्टी ने की। मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में ब्रह्माकुमारी सीमा दीदी, डॉ. भोसले दीदी, उप-प्राचार्य नारायण राउत, पर्यवेक्षक प्रो. संजय ढवले, एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. तुकाराम फिसफिसे और प्रो. राजेसाहेब रेंगे उपस्थित थे।
डॉ. धोंडगे ने आगे कहा कि आज की युवा पीढ़ी डिजिटल युग में जी रही है, जिसके सामने कई नई चुनौतियां हैं। इनमें सामाजिक शिक्षा और जागरूकता सबसे गंभीर चुनौती है। संतों और समाज सुधारकों ने जन-जागरण के लिए जो कार्य किए, उन्हें एनएसएस के माध्यम से आगे ले जाने में स्वयंसेवकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
डिजिटल लत से दूर रहें युवा: ब्रह्माकुमारी सीमा दीदी
व्यसनमुक्ति पर मार्गदर्शन करते हुए ब्रह्माकुमारी सीमा दीदी ने कहा कि युवाओं में डिजिटल उपकरणों की लत तेजी से बढ़ रही है, जिसके कारण अच्छे संस्कार और अध्ययन प्रभावित हो रहे हैं। इससे मेधावी छात्र भी पिछड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को यह समझना होगा कि डिजिटल गैजेट्स का इस्तेमाल कब, कितना और कैसे करना है। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों को व्यसनमुक्ति का संकल्प भी दिलाया।
अध्यक्षीय भाषण में उप-प्राचार्य डॉ. श्रीनिवास केशेट्टी ने कहा कि एनएसएस के जरिए विद्यार्थियों का सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास होता है और देश को जिम्मेदार नागरिक मिलते हैं। छात्रों को अपनी अंतर्निहित क्षमताओं को निखारकर समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को पूरा करने के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए।
कार्यशाला की प्रस्ताविकी डॉ. तुकाराम फिसफिसे ने रखी, जबकि संचालन और आभार प्रदर्शन अश्विनी कुंडगीर ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. दिगंबर रोडे, प्रो. सविता कोकाटे, प्रो. शरद कदम, प्रो. श्रद्धा पांडे, प्रो. वैशाली माचेवाड, सुरेश पेदापल्ली और सैयद सादिक ने सक्रिय योगदान दिया। इस दौरान 200 से अधिक स्वयंसेवक उपस्थित रहे।
