
परभणी, 4 सितंबर:
जिले में गंभीर सूखे की स्थिति को देखते हुए कपास, सोयाबीन और हल्दी उत्पादक किसानों को तत्काल फसल बीमा योजना का लाभ दिया जाए। यह मांग परभणी के विधायक डॉ. राहुल पाटिल ने जिलाधिकारी से की है। इस संबंध में विधायक डॉ. पाटिल के निर्देश पर शिवसेना के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी संजयसिंह चव्हाण से मुलाकात कर उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, परभणी तहसील में पिछले कुछ वर्षों से हल्दी की खेती के रकबे में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। चालू वित्त वर्ष में लगभग 2,142 किसानों ने 1,392 हेक्टेयर क्षेत्र में लगी हल्दी की फसल के लिए बीमा कराया है। हालांकि, मौजूदा खरीफ सीजन के जून और जुलाई महीनों में बारिश बेहद कम दर्ज की गई। औसत 247 मिमी बारिश के मुकाबले महज 77.6 मिमी वर्षा हुई है, जिससे फसलों को जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल सका।
बारिश की भारी कमी के कारण हल्दी की फसलों का विकास पूरी तरह रुक गया है और कई क्षेत्रों में फसलें सूखने के कगार पर पहुंच गई हैं। इससे उत्पादन में भारी गिरावट और किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान होने की आशंका गहरा गई है। हल्दी के अलावा सोयाबीन, कपास और मूंग की फसलें भी बर्बादी की कगार पर हैं। खाद, बीज, मजदूरी और कीटनाशकों की बढ़ती लागत से किसान पहले ही आर्थिक संकट में हैं, ऐसे में सूखे ने उनकी परेशानियां और बढ़ा दी हैं। इस संकट को देखते हुए जिले के सभी प्रभावित किसानों को बिना देरी फसल बीमा का मुआवजा देने की मांग की गई है।
खरीफ फसलों को बचाने के लिए तुरंत छोड़ा जाए पानी
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि खेतों में खड़ी फसलों को सूखने से बचाने के लिए निम्न दुधना परियोजना और जायकवाड़ी बांध से तुरंत बाएं नहर और नदी में पानी छोड़ा जाए।
विधायक डॉ. पाटिल ने कहा कि मानसून में लंबे अंतराल के चलते जिले में अकाल जैसे हालात बन गए हैं। प्रशासन को उपलब्ध जलभंडार का सटीक नियोजन कर किसानों के हित में तुरंत पानी उपलब्ध कराना चाहिए।
इस दौरान शिवसेना प्रतिनिधिमंडल में महानगर प्रमुख विवेक नावंदर, जिला प्रमुख विष्णु मुरकुटे, महिला आघाडी जिला प्रमुख अंबिका डहाळे, उपजिल्हा प्रमुख संजय गाडगे, पूर्व शहरप्रमुख अनिल डहाळे, कृउबा सदस्य अरविंद देशमुख, शहरप्रमुख ज्ञानेश्वर पवार, पूर्व जिलाप्रमुख संदीप भंडारी, रवींद्र पतंगे, पार्षद बबलू घागरमाळे, रामराव डोंगरे, संदीप झाडे, बाळराजे तळेकर, विशु डहाळे, दत्तराव मुळे, संभानाथ काळे, वंदना कदम, दगडू काळदाते, शिवलिंग बोधणे, सुशील नर्सीकर, देवेंद्र देशमुख, गणेश मुळे, महेश येरळकर, लखन पवार, उद्धव गरूड, रामा कदम, विट्ठल धस, रामप्रसाद जोगदंड, हनुमान भालेराव, श्रीकांत भालेराव, अक्षय भराडे, बालासाहेब गरूड, कैलास पतंगे, रमेश शेरे, दामोदर सानप और विनोद कदम प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।


