
पाथरी (विशेष संवाददाता):
खरीफ सीजन में बारिश की भारी कमी के चलते सरकार ने पाथरी तहसील को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इसके तहत वाघाला गांव में 1 अक्टूबर से फसलों के नुकसान के पंचनामे का काम शुरू हो चुका है। इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की धांधली रोकने और वास्तव में प्रभावित फसलों का ही सही आकलन दर्ज करने की मांग को लेकर स्थानीय किसानों ने प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है।
वाघाला निवासी किसान कार्तिक किरण घुंबरे और रघुनाथ अंबुरे ने पाथरी के उपविभागीय अधिकारी (एसडीएम) को एक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि वाघाला क्षेत्र में गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। ई-पंचनामा प्रक्रिया के दौरान कई लोगों ने गन्ने के खेत में खड़े होकर पड़ोस के सोयाबीन या अन्य फसलों की तस्वीरें ऐप पर अपलोड कर फर्जी पंजीकरण कराया है। किसानों ने चेताया कि यदि मौके पर जाकर वास्तविक फसल की जांच किए बिना पंजीकरण हुआ, तो सरकारी राजस्व को भारी चूना लगेगा और अपात्र लोगों में फर्जी अनुदान व फसल बीमा का वितरण हो जाएगा।
एक जगह बैठकर न हो खानापूर्ति
किसानों ने प्रमुखता से मांग उठाई है कि पंचनामे के लिए तैनात कर्मचारी कार्यालय या किसी एक स्थान पर बैठकर कागजी खानापूर्ति न करें। वे सीधे संबंधित किसान के खेत में जाएं, वहां खड़ी वास्तविक फसल का भौतिक सत्यापन करें और उसके बाद ही नुकसान दर्ज करें।
बटाईदार किसानों को मिले राहत का हक
ज्ञापन में बटाई और किराए पर खेती करने वाले किसानों की समस्या को भी रेखांकित किया गया है। किसानों का कहना है कि लागत, बीज, खाद और दिन-रात की मेहनत बटाईदार किसान की होती है, लेकिन प्राकृतिक आपदा के समय मुआवजा और बीमा राशि का भुगतान सीधे जमीन मालिक के खातों में चला जाता है। इससे वास्तविक मेहनत करने वाले किसान को दोहरा नुकसान झेलना पड़ता है। इसलिए सरकारी सहायता का लाभ वास्तविक रूप से पसीना बहाने वाले काश्तकार को ही मिलना चाहिए।
किसानों ने प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेकर पारदर्शी तरीके से पंचनामा कराने की गुहार लगाई है। इस ज्ञापन की प्रतियां तहसीलदार, खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) और तहसील कृषि अधिकारी को भी कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई हैं।
