राजनीतिराज्य

विचारधारा छोड़कर भाग गए सांसद जाधव

विधायक डाॅ राहुल पाटिल

परभणी/प्रतिनिधि:

“जिन्होंने अपने वोट और अपनी पार्टी को बेच दिया, क्या आप ऐसे लोगों पर विश्वास करेंगे? इन्होंने आपके द्वारा किए गए मतदान का भी घोर अपमान किया है।” यह तीखा प्रहार परभणी के विधायक डॉ. राहुल पाटिल ने हाल ही में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए किया।

​इस अवसर पर विधायक डॉ. राहुल पाटिल ने सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि ये लोग तर्क देते हैं कि हम सत्ता में शामिल हो रहे हैं क्योंकि सत्ता के बिना विकास कार्य संभव नहीं हैं। लेकिन हम विपक्ष में रहकर भी निरंतर जनता के काम कर रहे हैं। यदि आपमें क्षमता और साहस है, तो विपक्ष में रहकर भी जनहित के कार्य किए जा सकते हैं। लोकतंत्र के दो मुख्य स्तंभ होते हैं—एक विपक्ष और दूसरा सत्ता पक्ष। तो क्या लोकतंत्र में विपक्ष में नहीं रहना चाहिए? क्या अपने विचार व्यक्त नहीं करने चाहिए?

​उन्होंने आगे कहा, “आप अपनी विचारधारा को छोड़कर केवल स्वार्थ के लिए भाग गए हैं। आपने इस दलबदल के लिए कितने रुपये लिए हैं, यह पूरी जनता भली-भांति जानती है, इसलिए हमें ज्ञान देने की आवश्यकता नहीं है। परभणी की जनता ऐसी राजनीति कभी सहन नहीं करेगी।” उन्होंने कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि यहाँ के सांसद भले ही चले गए हों, लेकिन परभणी जिले की चारों विधानसभा सीटों पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधायक चुनकर लाना हमारा संकल्प है।

हम ‘ठाकरे ब्रांड’ हैं, हमें कोई भय नहीं:

विधायक पाटिल ने कहा कि परभणी की जनता ने सदैव शिवसेना को मान्यता दी है और यहाँ के शिवसैनिकों ने ठाकरे परिवार पर अटूट प्रेम बरसाया है। हमें किसी का डर नहीं है क्योंकि हम ‘ठाकरे ब्रांड’ हैं। उन्होंने विरोधियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग हमें डराने या चुनौती देने की भाषा कर रहे हैं, वे यह याद रखें कि राहुल पाटिल ईंट का जवाब पत्थर से देना जानते हैं। सत्ता के बल पर किसी को दबाने का प्रयास न करें। यदि किसी भी कार्यकर्ता को प्रताड़ित करने का प्रयास किया गया, तो मैं पूरी ताकत से उनके पीछे खड़ा हूँ।

राज्य की आर्थिक स्थिति पर चिंता:

राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए विधायक डॉ. राहुल पाटिल ने एक सेवानिवृत्त आईएएस (IAS) अधिकारी के हवाले से कहा कि आगामी छह महीनों में महाराष्ट्र की वित्तीय स्थिति ऐसी हो जाएगी कि अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी सरकारी खजाने में धन नहीं बचेगा। इस सरकार ने महाराष्ट्र को पूरी तरह से लूटने का काम किया है। जब तक जनता स्वयं रास्तों पर उतरकर इस अन्याय के विरुद्ध आवाज नहीं उठाएगी, तब तक वास्तविक क्रांति संभव नहीं है। इस जनविरोधी व्यवस्था को उखाड़ फेंककर पुनः भगवा लहराने तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।

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