राज्यराजनीति

ज्ञानराधा पतसंस्था का 3500 करोड़ का घोटाला:

मुंबई उच्च न्यायालय का केंद्र व राज्य सरकार को नोटिस

​छत्रपति संभाजीनगर/परभणी मुंबई उच्च न्यायालय की छत्रपति संभाजीनगर खंडपीठ ने ‘ज्ञानराधा बहुराज्यीय सहकारी साख सहकारी समिति (पतसंस्था) लिमिटेड’ के 3,500 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में केंद्र सरकार, महाराष्ट्र सरकार और अन्य संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है।

​जमाकर्ताओं ने ‘अनियमित जमा योजना प्रतिबंधक कानून, 2019’ के प्रभावी क्रियान्वयन और विशेष अदालतों की स्थापना के लिए यह याचिका (क्र. 12859/2025) दायर की है।

​घोटाले की पृष्ठभूमि

​ज्ञानराधा बहुराज्यीय सहकारी पतसंस्था द्वारा सावधि जमा (एफडी) की अवधि पूरी होने के बाद भी जमाकर्ताओं को उनकी राशि न लौटाए जाने के कारण महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में करीब 3,500 करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला सामने आया है। इस मामले में राहुल सुभाषराव सोनटक्के और अन्य 132 जमाकर्ताओं (कुल 133 याचिकाकर्ता) ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। ये जमाकर्ता बीड, परभणी, जालना, छत्रपति संभाजीनगर, धाराशिव और अहिल्यानगर जिलों के निवासी हैं, जिनमें छोटे व्यापारी, किसान और सेवानिवृत्त कर्मचारी शामिल हैं, जिनकी गाढ़ी कमाई इस संस्था में फंस गई है।

​कानूनी पक्ष – अनियमित जमा योजना प्रतिबंधक कानून, 2019

​केंद्र सरकार ने 2019 में जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए और अवैध जमा योजनाओं पर रोक लगाने के लिए यह कानून लागू किया था। इस कानून के अनुसार:

  • ​धारा 7: राज्य सरकार के लिए संपत्ति की जब्ती और प्रबंधन हेतु ‘सक्षम प्राधिकारी’ नियुक्त करना अनिवार्य है।
  • ​धारा 8: जब्त संपत्ति को बेचकर जमाकर्ताओं को उनका पैसा वापस दिलाने के लिए ‘विशेष अदालतों’ की स्थापना करना बाध्यकारी है।

​याचिकाकर्ताओं के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार ने अभी तक इस कानून का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं किया है, जिससे जमाकर्ताओं को न्याय मिलने में देरी हो रही है।

​याचिका की प्रमुख मांगें

  • ​बीड, परभणी, जालना, छत्रपति संभाजीनगर और अन्य प्रभावित जिलों के लिए कानून की धारा 7 के तहत तत्काल ‘सक्षम प्राधिकारी’ नियुक्त किया जाए।
  • ​उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सलाह से कानून की धारा 8 के तहत ‘विशेष अदालत’ स्थापित की जाए, जिसमें जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्तर के अधिकारी और पर्याप्त कर्मचारी वर्ग हो।
  • ​इस प्रक्रिया के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा आवश्यक राशि और बजटीय प्रावधान तत्काल उपलब्ध कराया जाए।
  • ​केंद्र सरकार और सहकारिता मंत्रालय इस कानून के क्रियान्वयन पर सीधा नियंत्रण रखें।

​अदालत का आदेश और अगली दिशा

​26 अक्टूबर 2026 को न्यायमूर्ति एन. बी. सूर्यवंशी और न्यायमूर्ति आबासाहेब डी. शिंदे की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने याचिका का संज्ञान लेते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। केंद्र सरकार, राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों के वकीलों ने यह नोटिस स्वीकार कर लिया है, और इस मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता युवराज आर. बारहाते पैरवी कर रहे हैं।

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