राज्य

आषाढी पंढरपूर वारी के लिए विशेष रेलगाड़ियों के उचित नियोजन की मांग

२० से ३० जुलाई के बीच अतिरिक्त विशेष ट्रेनें चलाने का भी आग्रह


महाराष्ट्र के परभणी के साथ अन्य जिलो से जानेवाले वारकरीयो की संख्या भारी–

परभणी:

आषाढी पंढरपूर वारी के दृष्टिगत दक्षिण-मध्य रेलवे प्रशासन द्वारा घोषित तीन विशेष रेलगाड़ियों का संचालन एक ही दिन किए जाने के नियोजन से वारकरी श्रद्धालुओं में भारी असंतोष व्याप्त है। लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा सुविधा को ध्यान में रखते हुए, इन विशेष ट्रेनों को एक ही दिन न चलाकर २० जुलाई से ३० जुलाई की अवधि में चरणबद्ध तरीके से संचालित करने की मांग रेलवे प्रशासन से की गई है।

​इस वर्ष आषाढी एकादशी यात्रा २५ जुलाई को संपन्न हो रही है। इस दिन भोर में सूर्योदय से पूर्व चंद्रभागा नदी के तट पर होने वाली काकड़ आरती के लिए वारकरी श्रद्धालुओं का २४ जुलाई की रात्रि तक पंढरपूर पहुंचना अत्यंत आवश्यक है। इसलिए, श्रद्धालुओं की धार्मिक परंपराओं और यात्रा की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विशेष रेलगाड़ियों का समय सारणी (टाइम टेबल) निर्धारित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है, ऐसा वारकरी संगठनों ने रेखांकित किया है। इसी पृष्ठभूमि में ‘नागरसोल-पंढरपूर’ और ‘अकोला-पंढरपूर’ विशेष रेलगाड़ियां २४ जुलाई की सुबह प्रस्थान करें, इस प्रकार उनकी समय सारणी सुनिश्चित की जानी चाहिए, जिससे श्रद्धालु २४ जुलाई की रात्रि तक पंढरपूर पहुंच सकें और काकड़ आरती सहित सभी धार्मिक अनुष्ठानों में सम्मिलित हो सकें।

​इसके अतिरिक्त, आषाढी वारी के दौरान संपूर्ण राज्य सहित मराठवाड़ा, विदर्भ, पश्चिमी महाराष्ट्र व अन्य क्षेत्रों से बड़ी संख्या में वारकरी पंढरपूर आते हैं, जिससे वर्तमान विशेष ट्रेनें अपर्याप्त सिद्ध हो सकती हैं। अतः २० जुलाई से ३० जुलाई की अवधि में विभिन्न मार्गों पर अधिक विशेष रेलगाड़ियां चलाने की भी पुरजोर मांग की गई है।

​लाखों वारकरी श्रद्धालुओं की सुरक्षित, सुगम और समयबद्ध यात्रा व्यवस्था सुनिश्चित करने, भीड़ नियंत्रण करने तथा धार्मिक कार्यक्रमों में समय पर उपस्थिति सुलभ कराने के व्यापक जनहित के उद्देश्य से रेलवे प्रशासन इस मांग पर सकारात्मक रूप से विचार करे और तत्काल आवश्यक निर्णय ले। इस आशय का एक मांग पत्र (ज्ञापन) विभागीय प्रबंधक के नाम परभणी स्टेशन मास्टर सुनील दत्त को सौंपा गया। यह ज्ञापन वारकरी और रेलवे यात्री संगठन के अरुण मेघराज, राजेंद्र मुंडे, सुरेश नाईकवाडे, रितेश जैन, दयानंद दीक्षित, मंगला मुदगलकर, मनीषा जाधव, रुस्तम कदम, कदीर लाला हाशमी, एडवोकेट शर्मा, दिलीप बोरुलकर, श्रीनिवास खटवटे आदि द्वारा संयुक्त रूप से प्रस्तुत किया गया।

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