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पूर्णा महावितरण में घटिया कार्यों पर लगेगी रोक

कार्य की सत्यता जांचे बिना नहीं होगा बिलों का भुगतान' – उपकार्यकारी अभियंता पांचाल का निर्णय

पूर्णा उप-संभाग में घटिया कार्यों पर सवाल

पूर्णा (सुशील दलवी):

पूर्णा महावितरण संभाग में ठेकेदारों द्वारा किए जाने वाले विभिन्न विकास एवं रखरखाव कार्यों की गुणवत्ता को लेकर अब प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। नवनियुक्त उपकार्यकारी अभियंता पांचाल ने संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश देते हुए आदेश दिया है कि “वास्तविक कार्य की सत्यता और गुणवत्ता सुनिश्चित किए बिना कोई भी बिल उप-संभागीय कार्यालय में प्रस्तुत न किया जाए।”

​उन्होंने स्पष्ट किया कि पीएम/बीएम रखरखाव तथा अन्य योजनाओं के अंतर्गत होने वाले सभी कार्यों में स्वीकृत स्तर की सामग्री का उपयोग करना, तकनीकी मानदंडों का पालन करना और कार्य की गुणवत्ता बनाए रखना अनिवार्य है। इसके साथ ही सभी अधिकारियों को जिम्मेदारी से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि कागजों पर दिखाई गई गुणवत्ता वास्तविक कार्य में भी परिलक्षित हो।

​नागरिकों द्वारा यह आरोप लगाया जा रहा है कि पूर्णा महावितरण संभाग में पिछले कुछ वर्षों में घटिया स्तर के कार्यों, अधूरे कार्यों और कथित फर्जी बिलों को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण नागरिकों ने महावितरण की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े किए थे।

​ऐसी स्थिति में उपकार्यकारी अभियंता पांचाल द्वारा अपनाए गए कड़े रुख से घटिया कार्य करने वाले ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है। इससे यह संकेत मिल रहे हैं कि अब केवल गुणवत्तापूर्ण कार्य करने वालों को ही प्राथमिकता दी जाएगी। चेतावनी दी गई है कि यदि कार्य घटिया या अधूरा पाया गया, तो संबंधित बिल अस्वीकार कर दिया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

प्रतिक्रिया:

“पूर्णा शहर और तहसील में कई स्थानों पर बिना अनुमति के बिजली के खंभे खड़े करने, डीपी, शिफ्टिंग, पोल शिफ्टिंग तथा अन्य विद्युत कार्य किए गए हैं। इन कार्यों को आवश्यक स्वीकृति प्राप्त थी या नहीं, उनकी गुणवत्ता कैसी थी और क्या संबंधित गुणवत्ता नियंत्रण एवं शाखा अभियंता अधिकारियों ने इनकी जांच की थी, ऐसे कई अनुत्तरित प्रश्न खड़े हो रहे हैं। अतः इन सभी कार्यों की गहन जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।”

– राजू नारायणकर, सामाजिक कार्यकर्ता, पूर्ण

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