एपीजे अब्दुल कलाम इंटरनेशनल फाउंडेशन को संयुक्त राष्ट्र में वैश्विक मान्यता–

जिला संवाददाता परभणी– इतिहास के पन्नों में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ते हुए, भारतरत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम इंटरनेशनल फाउंडेशन ने विश्व शांति और युवा सशक्तिकरण के अपने मिशन को संयुक्त राष्ट्र के मंच पर आधिकारिक रूप से प्रस्तुत किया है। इस प्रतिष्ठित प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रामेश्वरम की मिट्टी के लाल और स्थानीय सरकारी स्कूल के पूर्व छात्र श्री रामकन्नन ने किया। उन्होंने एक छोटे से द्वीप से निकलकर दुनिया के सबसे बड़े राजनयिक मंच तक पहुँचकर सफलता की नई इबारत लिखी है।
“जनता के राष्ट्रपति” की गूँज अब वैश्विक स्तर पर
संयुक्त राष्ट्र में फाउंडेशन की यह उपस्थिति एक राष्ट्रीय आंदोलन के वैश्विक संस्था में बदलने का प्रमाण है। इस सत्र के दौरान, फाउंडेशन ने डॉ. कलाम के दूरदर्शी सिद्धांतों पर आधारित ‘सतत भविष्य’ का रोडमैप पेश किया।
इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण प्राचीन तमिल दर्शन का वह उद्घोष रहा- “संपूर्ण विश्व मेरा गाँव है और सभी लोग मेरे अपने हैं”। यही संदेश फाउंडेशन के घोषणापत्र की आत्मा बना, जिसके माध्यम से शिक्षा, विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण के लिए सीमाओं से परे जाकर काम करने की वकालत की गई।
फाउंडेशन का लक्ष्य और वैश्विक पहल–
फाउंडेशन ने संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधियों के सामने अपना व्यापक एजेंडा रखा, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया गया-
- अंतरराष्ट्रीय युवा सशक्तिकरण- विकासशील देशों में नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए “कलाम मॉडल” को लागू करना और ग्रामीण प्रतिभाओं को वैश्विक मंच प्रदान करना।
- जलवायु कार्रवाई और स्थिरता- पौधारोपण और “ग्रीन इंडिया” जैसे अभियानों को संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के साथ जोड़ना।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अंतरिक्ष शिक्षा- अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए उपग्रह तकनीक और अंतरिक्ष विज्ञान की समझ वंचित वर्ग के छात्रों तक पहुँचाना।
- सार्वभौम भाईचारा- “याथुम ऊरे” (विश्व बंधुत्व) के दर्शन को वैश्विक संघर्षों के समाधान के रूप में प्रस्तुत करना।
सरकारी स्कूल से वैश्विक नेतृत्व तक का सफर–
श्री रामकन्नन की यात्रा फाउंडेशन के उद्देश्यों की सबसे बड़ी सफलता है। एक छोटे से कस्बे के सरकारी स्कूल से निकलकर संयुक्त राष्ट्र में प्रतिनिधित्व करने तक का उनका सफर यह साबित करता है कि यदि ग्रामीण प्रतिभा को सही मार्गदर्शन मिले, तो वह विश्व स्तर पर कीर्तिमान स्थापित कर सकती है।
फाउंडेशन का वक्तव्य-
“संयुक्त राष्ट्र में हमारा प्रतिनिधित्व केवल फाउंडेशन की उपलब्धि नहीं, बल्कि हर उस छोटे गाँव के छात्र की जीत है जो बड़े सपने देखने का साहस करता है। हम दुनिया को यह बताने आए हैं कि अगला महान वैज्ञानिक या नेता रामेश्वरम के किसी सरकारी स्कूल की बेंच पर बैठा हो सकता है।”
इस ऐतिहासिक उपलब्धि से रामेश्वरम सहित पूरे देश में गर्व की लहर है। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की विरासत आज भी दुनिया को एक बेहतर और एकजुट भविष्य के लिए प्रेरित कर रही है।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम इंटरनेशनल फाउंडेशन के बारे में-
भारत के 11वें राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की यादों और आदर्शों को जीवित रखने के लिए स्थापित यह फाउंडेशन शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण के क्षेत्र में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निरंतर कार्यरत है।

