
परभणी
‘अल नीनो’ के प्रतिकूल असर के चलते राज्यभर में गंभीर सूखे के हालात बन गए हैं, जिससे फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। इस संकट की घड़ी में केंद्रीय मंत्री के रूप में सूखा प्रभावित किसानों को केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव और अधिकतम आर्थिक सहायता दिलाने के लिए पुरजोर सिफारिश करूंगा। यह आश्वासन केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने दिया।
केंद्रीय मंत्री आठवले ने सेलू तहसील के वालूर गांव में किसान तजम्मूल अहमद अब्दुल हक अंसारी के खेत में जाकर हल्दी की खराब हुई फसल का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया और किसानों से संवाद साधा।
इस मौके पर तहसीलदार डॉ. शिवाजी मगर, कृषि अधिकारी शेळके और मंडल अधिकारी प्रभावती खाकरे सहित स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधि मौजूद थे।
किसानों ने साझा कीं अपनी समस्याएं
किसानों ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि बीते साल का फसल बीमा क्लेम अब तक उनके खातों में नहीं पहुंचा है, वहीं क्षेत्र में मवेशियों के पीने के पानी की समस्या भी दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। किसानों ने यह मलाल भी जाहिर किया कि मराठवाड़ा दौरे पर आई केंद्रीय सूखा जांच टीम ने उनके इलाके का मुआयना नहीं किया।
छावनियों की बजाय डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) की मांग
सूखे की स्थिति पर चर्चा करते हुए किसान अंसारी ने सुझाव दिया कि पशुओं के लिए पारंपरिक चारा छावनियां (कैटल कैंप) शुरू करने के बजाय सरकार सीधे किसानों के बैंक खातों में आर्थिक सहायता राशि जमा कराए, ताकि वे अपनी जरूरत के अनुसार व्यवस्था कर सकें।
निरीक्षण के बाद श्री आठवले ने कहा कि फसल बर्बादी, सिंचाई के लिए पानी का गहरा अभाव और लंबे समय से अटका फसल बीमा—इन तीनों कारणों ने किसानों को गहरे आर्थिक संकट में धकेल दिया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे इस जमीनी हकीकत से केंद्र सरकार को रूबरू कराएंगे और किसानों को जल्द राहत दिलाने की हर मुमकिन कोशिश करेंगे। 
